मध्य प्रदेश

एक दर्जन निर्माण कार्यों में करोड़ों की राशि का किया बंदरबाट

कपासी ग्राम पंचायत में नागर एंड नागर ब्रदर्स के कागजी कामों की गूंज राजधानी तक – जल्द ही पुलिस प्राथमिकी और शासकीय राशि वसूलने की कार्यवाही होना तय – एक दर्जन निर्माण कार्यों की करोड़ों की राशि का किया बंदरबाट गुना। बमोरी जनपद पंचायत की कपासी ग्राम पंचायत पिछले कई वर्षो से अपनी दुर्दशा पर आसू बहा रही है। इस ग्राम पंचायत में कागज़ो में काम दर्शा कर करोड़ों की राशि सहायक सचिव और उसके कियोस्क संचालक भाई हरिओम नागर ने निकाल ली है। कपासी ग्राम पंचायत में पदस्थ सहायक सचिव प्रभुदायल नागर राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में मजदूरों के हित की राशि को भी अपने भाई के साथ मिलकर हजम कर रहा है।हैरत की बात है कि मरे हुए लोगो के नाम राशि निकली जा रहे है वही अन्य ग्राम में काम करने वाले शासकीय सेवक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के नाम वर्षो से मजदूर बनाकर राशि निकाल ली गई।बता दे कि पहले तो कर्मचारी है उसे मजदूरी देने की पात्रता नही है दूसरे यदि उसको मजदूरी दी गई तो उसकी जगह किसका खाता लगाया गया जिससे उस कार्यकर्ता पर भी विभाग उंगलियां उठा रहा है।इस बात कि तह तक जाना आवश्यक है कि बैंक प्रबंधन इस खूसखोरो की किस प्रकार मदद कर रहा है। ग्राम पंचायत कपासी में सर्वप्रथम नरेगा अधिकारी को पूरे खातों की जांच कर ये देखना चाइए कि कितने मरे हुए लोगो को रोजगार दिया जा रहा है फिर कितने नबालिको को रोजगार दे रहे है और फिर कितने लोग कार्य कर रहे है। ऐसे कितने लोग है जिन्होंने काम नही किया और सहायक सचिव प्रभु दयाल नागर और उसके भाई हरिओम नागर ने उनके पैसे निकाले और इनके किसके खातों का उपयोग किया गया। ये सभी आर्थिक अपराध को श्रेणी में आता है जिसके चलते इस पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर शासकीय राशि वसूलने की कार्यवाही की जाना चाइए। ऐसे चलता है स्कैम का पुरा सिस्टम फर्जी मजदुरी घोटाले का खेल ऐसे होता है कि सचिव के द्वारा या रोजगार सहायक या सरपंच के द्वारा अपने सगे संबंधियों या ऐसे चहेते लोगों के खाते में राशि डाली जाती है जो की राशि डालने पर वापस उस राशि को निकाल कर सचिव को सुपुर्द कर दें अब बिना काम किए उन लोगों के खाते में फर्जी मस्टररोल के माध्यम से राशि हर महीने भेजी जाती है जो की कभी भी काम नहीं करते हैं और फिर भी वे पैसा निकाल कर सचिव सरपंच रोजगार सहायक को देते हैं, इसी तरह से कपासी ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाले का पूरा खेल चल रहा है और इसमें काफी बड़ी राशि का गबन किया जा रहा है यहां आपको बताते चलें कि भ्रष्टाचार करने का प्रयास करना भी अपराध की श्रेणी में आता है. जेसीबी से लिया कार्य : मनरेगा योजना का उद्देश्य लोगो को रोजगार प्रदान करने की गारंटी देता है ताकि गरीब मजदूर वर्ग के लोगों का जीवन यापन आसानी से हो सके, इन भ्रष्ट लोगों के द्वारा उनके अधिकारों का हनन करते हुए मनरेगा के कार्य को जेसीबी मशीन से करा कर कुछ चुनिंदा लोगों के खातों मे राशि का भुगतान कर के बहुत ही शातिर तरीके से राशियों का हेरफेर कर लिया जाता है, इनके बिल भुगतान भी बहुत ही सरल तरीके से हो जाता है। ग्राम पंचायत में सीसी रोड का निर्माण में भी इन लोगों के द्वारा अपने नाम का फर्म बना कर राशि का आहरण कर लिया जाता है, ऐसे काम के लिए इनके हौसले इतने बुलंद है कि प्रशासन का इनको जरा भी डर नहीं है। लाखों रुपये निकलने के बाद भी नही हो पाया निर्माण रोजगार सहायक प्रभुदयाल नागर के एक से बढ़कर एक मामलें निकलकर सामने आ रहे है और प्रभुदयाल नागर जनपद एवं जिला पंचायत अधिकारियों से गांधी बाबा वाली सेटिंग लगा कर मामलों को निपटाने में लगा है।उक्त रोजगार सहायक के द्वारा अभी तक एक दर्जन के लगभग निर्माण कागजों में करकर लाखों रुपये निकाल लिया जैसे की बाउंड्री वाल निर्माण के लिए बिल नवंबर 376 राशि 20900,बिल नंबर 344 राशि 70000,बिल नंबर 325 राशि 65000,बिल नंबर 299 राशि 80500,बिल नवंबर 143 राशि 78000 रुपये इस प्रकार एक दर्जन निर्माण कार्यों में बिल डालकर निकाल ली गई परंतु आज दिनांक तक धरातल पर निर्माण नहीं हो पाया और इन निर्माण की रोजगार सहायक प्रभुदयाल नागर से बातचीत की तो उन्होंने बताया की दूसरी जगह निर्माण कर दिए है।इन निर्माण कार्यों के बारे में ग्रामीणों से पूछा तो उन्होंने बताया की उक्त निर्माण की ईट तक नहीं रखी हुई हमारे रोजगार सहायक के ऐसे कई मामले है अगर कही हमारी पंचायत की बारीकी से जांच हो जाए तो रोजगार सहायक को सलाखों के पीछे जाने से कोई भी नहीं रोक सकता।

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