मध्य प्रदेश

पिछले दस साल से खुद को सरपंच बताकर,भ्रष्टचार खुल कर करने की बात कबूली

खुद को जनप्रतिनधि कहने वाले मस्ता यादव ने,मजदूरों एवं बिलों के नाम पर लाखों का किया गोलमाल – जनपद पंचायत सीईओ को कहता ये है छोटा कर्मचारी – पिछले दस साल से खुद को सरपंच बताकर,भ्रष्टचार खुल कर करने की बात कबूली गुना।गुना जिले का एक और चौकाने वाला मामला सामने आ रहा है जहां पूर्व में भ्रष्ट सरपंच सचिवों को अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होता था किंतु आरोन जनपद पंचायत में उल्टा ही देखने को मिल रहा है। पहले जनपद पंचायत सीईओ को सरपंच और सचिव छोटा सा कर्मचारी हुआ करता था। किंतु आज हालत कुछ और है।आरोन जनपद पंचायत में पदस्थ सहायक यंत्री दिनेश शाक्य को अपने काले कारनामों और भ्रष्टचार से बचने के लिए अब मस्ता यादव जैसे पूर्व सरपंच प्रतिनिधियों का सहारा लेना पड़ रहा है जो खुद फर्जी मजदूरों के मस्टर एवं बिल बनाकर ग्राम पंचायत में लाखों का घोटाला करने का सूत्रधार है। इनके पिता पूर्व में राधौगढ़ किले के विराध में चुनाव लड़कर हार चुके है तो इस बात को लेकर उक्त यादव हमेशा अधिकारियों को राधौगढ़ किले हलाने की कहानी सुनाता रहता है। साथ ही सीईओ स्तर के अधिकारियों को तो ये छोटा सा कर्मचारी मानता है। समय-समय पर आरोन में दिनेश शाक्य जैसे सहायक यंत्री और अन्य भ्रष्ट कर्मचारी नियुक्त हुए है ऐसे कर्मचारियों का संरक्षण पाकर फर्जी मजदूरों के मस्टर एवं बिल लगाकर जीएसटी की लाखों की चोरी सरपंच प्रतिनिधियों ने बेखौफ की है। जिसके चलते दिनेश शाक्य जैसे अधिकारियों से इसका दामन चोली का साथ हो गया है। मीडिया और पत्रकारों से खुद के नजदीकी संबंध बताकर अधिकारियों पर भरपूर दबाव बनाकर रखने में ये मास्टर माइंड है। जबकि मीडिया का कोई भी साथी इसके आर्थिक घोटाले में सामिल नही है जो इसने आरोन की रामगिरकलॉ ग्राम पंचायत में पूर्व में दूसरे निरक्षर सरपंचों के कंधो पर कारित किए।मस्ता यादव का कहना है कि भाजपा शासन में किसी का कुछ नही होता, हम पिछले दस साल से खुलकर भ्रष्टचार कर रहे है किसी मीडिया बंधु या अधिकारी ने क्या कर लिया।लगातार गुना जिला पंचायत अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायतों में यही मानसिकता सभी अधिकारी,कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की हो गई है जिसके चलते पंचायत मंत्री सहित भाजपा संगठन की छवि पर कालिख लगती नजर आ रही है।जीएसटी की चोरी कर लाखो का गोलमाल, बिना कार्य किए कागजों में राशि निकलाना,नरेगा में मजदूरों का हक भी न छोड़ना गुना जिले की जनपद पंचायतों की दासता बन गई है जिसके चलते रामगिरकलॉ ग्राम पंचायत के अदने से जनप्रतिनिधि खुद को अधिकारियों का आका बताकर जनपद पंचायत सीईओ को छोटा सा कर्मचारी कहने से भी बाज नही आते। ग्राम पंचायत रामगिरकलॉ में पूर्व के दस साल की यदि जांच की जाए तो बड़े चौकाने वाले मामले उजागर होना तय है। मस्ता(जयमाल) यादव ने पुत्र-पुत्री को भी बनवाया मजदूर मस्ता(जयमाल)यादव के पुत्र रवजीत पुत्री पूनम यादव वैसे तो स्टूडेंट है लेकिन मस्ता(जयमाल) यादव पूर्व में रामगिरकलॉ के सरपंच प्रतिनिधि होने के कारण दोनों बच्चों को कागजों में मनरेगा मजदूर बनवाकर लाखों रुपये हजम तो कर ही डाले साथ ही फर्जीवाडे़ को भी अंजाम दिया। लेकिन इस प्रकार के फर्जीवाडे़ होने के बाद भी अधिकारियों ने कोई कार्यवाई नही कि यह सबसे बडा़ सवाल है तो इस मामले को लेकर तहकीकात की हमारी टीम ने तो तहकीकात से निकलकर सामने आया की मस्ता(जयमाल)यादव की गुंडागिर्दी हावी होने के कारण कार्यवाई नही हो पाती लेकिन अब अधिकारियों को शायद समाचार पढ़ने के बाद कार्यवाई करने का जोश उठ सकता है

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